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प्लुत स्वर 0

प्लुत स्वर

प्लुत स्वर   जिन स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वरों से भी अधिक समय लगता है उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं। प्रायः इनका प्रयोग दूर से बुलाने में किया जाता है। इनकी मात्रा ३...

वात्सल्य रस 0

हिंदी व्याकरण में वात्सल्य रस

वात्सल्य रस   माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह या अनुरागकहलाता...

वीर रस 0

हिंदी व्याकरण में वीर रस

  युद्ध अथवा किसी कठिन कार्य को करने के लिए हृदय में जो उत्साह जाग्रत होता है, उससे ‘वीर रस’ की निष्पत्ति होती है। वीर रस का स्थायी भाव “उत्साह” होता है उदाहरण- वह खून...

भयानक रस 0

हिंदी व्याकरण में भयानक रस

हिंदी व्याकरण में भयानक रस   जब वातावरण को देखकर मन में भय उत्पन्न होता है या मन में किसी बात को लेकर डर होता है। वहीं पर भयानक रस का जन्म होता है।...

वीभत्स रस 0

हिंदी व्याकरण में वीभत्स रस

    घृणित वस्तुओं, घृणित चीजो या घृणित व्यक्ति को देखकर या उनके संबंध में विचार करके या उनके सम्बन्ध में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा या ग्लानि ही वीभत्स रस कि...

हिंदी व्याकरण में करुण रस 0

हिंदी व्याकरण में करुण रस

  बन्धु–विनाश, बन्धु–वियोग, द्रव्यनाश और प्रेमी के सदैव के लिए बिछुड़ जाने से करुण रस उत्पन्न होता है। दुःख का अनुभव वियोग शृंगार में भी होता है, पर वहाँ मिलने की आशा भी बनी रहती...