हिंदी व्याकरण में शान्त रस 0

हिंदी व्याकरण में शान्त रस

शान्त रस   संसार से वैराग्य होने पर, परमात्मा के वास्तविक रूप का ज्ञान होता है और मन को जो शान्ति मिलती है वहाँ शान्त रस कि उत्पत्ति होती है स्थायी भाव निर्वेद (उदासीनता)...

हिंदी व्याकरण में रौद्र रस 0

हिंदी व्याकरण में रौद्र रस

रौद्र रस किसी व्यक्ति के द्वारा क्रोध में किए गए अपमान आदि के उत्पन्न भाव की परिपक्वावस्था को रौद्र-रस कहते हैं। उदाहरण 1-उस काल मरे क्रोध के तन काँपने उसका लगा मानो हवा के...

हिंदी व्याकरण में अदभुत रस 0

हिंदी व्याकरण में अदभुत रस

अदभुत रस ब्यक्ति के मन में विचित्र अथवा आश्चर्यजनक वस्तुओं को देखकर जो विस्मय- भाव उत्पन्न होते हैं उसे ही अदभुत रस कहा जाता है इसका स्थायी भाव आश्चर्य होता है   1-देख यशोदा...

हिंदी व्याकरण में श्रृंगार रस 0

हिंदी व्याकरण में श्रृंगार रस

हिंदी व्याकरण में श्रृंगार रस श्रृंगार रस (Shringar Ras) में नायक और नायिका के मन में स्थित रति या प्रेम जब रस के अवस्था में पहुंच जाता है तो वह श्रृंगार रस (Shringar Ras)...

हिंदी व्याकरण में हास्य रस 0

हास्य रस

हास्य रस   जहाँ वेशभूषा, वाणी आदि की विकृति या विचित्र स्थितियोंको देखकर मन में जो विनोद का भाव उत्पन्न होता है उससे हास की उत्पत्ति होती है, इसे ही हास्य रस कहा जाता...

हिंदी व्याकरण में रस 0

हिंदी व्याकरण में रस

हिंदी व्याकरण में रस “रस्यते इति रसः” के अनुसार रस का ताात्पर्य स्वाद से है। जिस प्रकार से भोजन जब मुख में डाला जाता है तब अनेक प्रकार का स्वाद प्राप्त होता है ठीक...